Story telling – Bhole Firangi

I have been writing stories for a while now but its so much fun to have an audience who would want to hear your stories! Here the link of my story telling

Tribute to M P Ranjan

A poem for my beloved and most respected teacher Mr. M P Ranjan.

खबर सुनी, एक बरस पूर्व, के थम गयी दुनिया सारी।
सबके अजीज दिल खुशमिज़ाज वो छोड़े दुनियादारी।

कभी गुरु से वो हम मित्र बने और कभी मित्रों के गुरु
दुनिया बेहतर जिस बात से हो बस वो ही बात शुरू।

वे फिरते देश विदेशों में पर होते सबके पास
एक इ मेल भर की दुरी और रंजन आपके साथ।

कुछ नए प्रश्न और उत्तर भी उनके हर पल के साथी।
फिर चाहे वो शहरों में मिलें या घूमें चढ़ के हाथी।

जिस जिस के जीवन काल में उनके दर्शन का सौभाग्य जुड़ा
वो हर व्यक्ति भूले भटके ग्रास रुट की ओर चला

डिजाईन एक समस्या है – उत्तर है या देख भालने की है कला
इन सबकी गुत्थी में रंजन, देखो हम को है छोड़ चला

बस यही कामना बाकि है मेरी अब उस परमेश्वर से
मुझे हर एक जनम हर बार प्रभु बस रंजन जैसा गुरु मिले।

V Blog started

Here I started my videos on stories and experiences.
This post is about one of my encounter with a rickshaw driver.

एक और बरस

एक और बरस अब बीत गया या आने वाला है
ये भी किस्सों की परतों में दब जाने वाला है

परतें दर परतें जम जम कर पत्थर बन जाती हैं
बीच उसी के पत्ते लकड़ी सब जड़ जाती है

बनते है जीवाश्म कई फिर ढूँढे जाते हैं
जाने कौन बरस के किस्से मुंडे जाते हैं

वो भी होगा नया बरस जब लोगो ने माना
हमने उनकी परतें सारी खोल के ये जाना

चलो अपने जीवाश्मों को कुछ जांच परख हम लें
नया साल और बात पुरानी साथ साथ रख लें

स्त्री की भूमिका

ये गलियों थोड़ी संकरी हो गयी हैं.
और मुझे खुल के चलने की आदत है.

काश की बचपन से ही मुझे
उस पात्र के बारे में बता दिया होता
जिसकी भूमिका मुझे अदा करनी है.

मुझसे ऐसे पात्र की उम्मीद है
जिसका कोई नजरिया न हो
जो हाँ में हाँ मिलाये और
सही गलत में फर्क न कर पाए.

जिसे अपने शरीर का भान तो हो
पर उसमे बसने वाले प्राणी का ज्ञान न हो
जिसे सजा धजा रहना है
पर खूबसूरत होने का अधिकार नहीं.

बचपन में हम सब बच्चे थे,
तब किसी ने क्यूँ नहीं कहा की,
बड़े होकर मुझे स्त्री की भूमिका निभानी है.
मैं शायद बड़ी ही न होती.

अब मुझे रोज एक सभ्य महिला बनाना है
बहुत उमीदें हैं
और दर्शक सारा ज़माना है.

RakshaBandhan

It’s been years since I have celebrated Rakhi with my brother and sister.
Those fights and caring, the joy of mixed emotions.

Happy Birthday
Happy Rakhi

 

Mumbai :Life

If you have lived in Mumbai ever, you know what I am going to talk about here,
Mumbai, the city which has space for anyone and everyone. It makes you feel comfortable, you can be yourself, you can have influential friends without being super rich.
The city where your half the life lived in traffic jams.

The property bubble has not burst yet. Outsider can not afford to have their own room forget about buying a house.
I myself looking for another accommodation in every six months, so when my friend came to me for an artwork to find a house for him… look what I made

Jetly needs a house