Kesar केसर

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रहीम

Brotherhood
Brotherhood

चुरा लेंगे

Chura Lenge
Chura Lenge

मतदान कीजिये

मतदान कीजिये अवश्य कीजिए…
ध्यान में रखिये की ये आपका नहीं देश का सवाल है.
वही देश जहाँ कई लोग बेवजह मालामाल हैं…
बड़ी अजीब समस्या है पर गरीबो के दान से अमीर बनते है.
और आज भी हम अपने अधिकार को खैरात समझते हैं.
यदि आपको खैरात में बाप बनाने का इतना ही शौक़ है…
तो कृपा करके अपने मत को अपने तक ही सिमित रखिये…
बिना सोचे मतदान से तो अच्छा है की
आप मत दान कीजिये…

क्या बात है आप आजकल आते नहीं…

क्या बात है आप आजकल आते नहीं…
आयें कैसे आप आजकल बुलाते नहीं,

और अगर बुलाया भी तो ठीक से बैठाते नहीं,
दो बिस्किट प्लेट में रख के कह देते हो की
गर्मियों का मौसम है, और चाय पिलाते नहीं…

मौसम बदल जाने की बातें करते हो,
और खुद बदल जाने से कतराते नहीं.

अजीब आदमी हो यार, खातिरदारी करनी आती नहीं,
और कहते को की
क्या बात है आप आजकल आते नहीं…

कम्बखत कलम

आजकल मैंने छुट्टी ली है,
कुछ समय से लिखने का मन है,
महीने गुज़र रहे हैं
पर ये कम्बखत कलम चलती ही नहीं.

Literally,
I am on vacation these days,
Its been a while, since I am in the mood of writing something.
Months are passing by,
But this stupid pen is just not moving forward…

ओम दर ब दर

एक किस्से को हमने
देखा इस कदर
की गोल- गोल घूमती
रेखाएं गयी बिफर

है फिकर जो मेंढको की
तू नौजवां बेसबर …
ये दास्ताँ-ए-इश्क है
के है हर रोज़ की खबर
गायत्री मंत्र है ऐसा
तू जप निरंतर निडर

रोज की बात नहीं पर
रोजाना की है डगर
अगर मगर और नहीं
रे ओम दर ब दर
ओम दर ब दर

“Om dar ba dar”  is a cult film, which took years to be recognized by its people.
When I first watched this film in my 2nd year of collage in auditorium, I could not understand a thing in it. I was very surprised why people appreciate it or its only for some cool kind of people who understand meaning beyond ordinary.
After some time I saw some more films from all around the world and got familiar with different kind of story telling.
For me, story telling is like mathematics. Most of the people deal with only basics of it, but there is much more to it, there is algebra, trigonometry,calculus and many other higher forms to reached “hence proved” one has to assume something and create calculations out of nowhere.