Tribute to M P Ranjan

A poem for my beloved and most respected teacher Mr. M P Ranjan.

खबर सुनी, एक बरस पूर्व, के थम गयी दुनिया सारी।
सबके अजीज दिल खुशमिज़ाज वो छोड़े दुनियादारी।

कभी गुरु से वो हम मित्र बने और कभी मित्रों के गुरु
दुनिया बेहतर जिस बात से हो बस वो ही बात शुरू।

वे फिरते देश विदेशों में पर होते सबके पास
एक इ मेल भर की दुरी और रंजन आपके साथ।

कुछ नए प्रश्न और उत्तर भी उनके हर पल के साथी।
फिर चाहे वो शहरों में मिलें या घूमें चढ़ के हाथी।

जिस जिस के जीवन काल में उनके दर्शन का सौभाग्य जुड़ा
वो हर व्यक्ति भूले भटके ग्रास रुट की ओर चला

डिजाईन एक समस्या है – उत्तर है या देख भालने की है कला
इन सबकी गुत्थी में रंजन, देखो हम को है छोड़ चला

बस यही कामना बाकि है मेरी अब उस परमेश्वर से
मुझे हर एक जनम हर बार प्रभु बस रंजन जैसा गुरु मिले।