Tribute to M P Ranjan

A poem for my beloved and most respected teacher Mr. M P Ranjan.

खबर सुनी, एक बरस पूर्व, के थम गयी दुनिया सारी।
सबके अजीज दिल खुशमिज़ाज वो छोड़े दुनियादारी।

कभी गुरु से वो हम मित्र बने और कभी मित्रों के गुरु
दुनिया बेहतर जिस बात से हो बस वो ही बात शुरू।

वे फिरते देश विदेशों में पर होते सबके पास
एक इ मेल भर की दुरी और रंजन आपके साथ।

कुछ नए प्रश्न और उत्तर भी उनके हर पल के साथी।
फिर चाहे वो शहरों में मिलें या घूमें चढ़ के हाथी।

जिस जिस के जीवन काल में उनके दर्शन का सौभाग्य जुड़ा
वो हर व्यक्ति भूले भटके ग्रास रुट की ओर चला

डिजाईन एक समस्या है – उत्तर है या देख भालने की है कला
इन सबकी गुत्थी में रंजन, देखो हम को है छोड़ चला

बस यही कामना बाकि है मेरी अब उस परमेश्वर से
मुझे हर एक जनम हर बार प्रभु बस रंजन जैसा गुरु मिले।

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Kesar केसर

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रहीम

Brotherhood
Brotherhood

हम्पी

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एक और बरस

एक और बरस अब बीत गया या आने वाला है
ये भी किस्सों की परतों में दब जाने वाला है

परतें दर परतें जम जम कर पत्थर बन जाती हैं
बीच उसी के पत्ते लकड़ी सब जड़ जाती है

बनते है जीवाश्म कई फिर ढूँढे जाते हैं
जाने कौन बरस के किस्से मुंडे जाते हैं

वो भी होगा नया बरस जब लोगो ने माना
हमने उनकी परतें सारी खोल के ये जाना

चलो अपने जीवाश्मों को कुछ जांच परख हम लें
नया साल और बात पुरानी साथ साथ रख लें

चुरा लेंगे

Chura Lenge
Chura Lenge