खाली कमरा

आँखों के पास कमरा खाली था
आँखों के पास कमरा खाली था तो
उसने सोचा की चलो एक किरायेदार रख ले.
एक सपने को बुलाया विचारों के ब्रोकर ने
और उसे आँखों का खाली कमरा दिखलाया.

आँखें भी सपने को पाकर खुश थी बड़ी
क्यूकी गुजारा करने की उम्मीद जो नज़र आई थी.
सपना मज़े से रहने लगा आँखों में
आखिर जगह पायी थी उसने लाखो में.

एक दिन अचानक सपने ने देखा की बालकोनी में कोई डेरा जमाये बैठा है.
एक दिन अचानक सपने ने देखा की बालकोनी में कोई डेरा जमाये बैठा है…
जाँच पड़ताल की तो पता चल की आंसू भाईसाब फरमायें हैं,
और बोरिया बिस्टर लेकर हमेशा रहने के इरादे से आये हैं.

जब बात आँखों तक पहुंची तो आँखों ने की तफ्तीश.
अरे भाई आंसू ,” कैसे रह सकते हो तुम बिना डेपोसिट बिना फीस …
मैं तो नियति से बंधा हूँ ऐसा आंसू ने बोला
और बातो ही बातो में ये गहरा राज खोला.

सपने जब हवा में होते हैं तो रह जाते हैं
पर जब आँखों में बसते  हैं तो आंसू के साथ बह जाते हैं !!!

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4 thoughts on “खाली कमरा”

  1. I felt sad, then I read it again and felt it was positive and shining clear, because I remembered that I cry when I am full of sorrow AND when I am filled with joy. 🙂 Let us meet soon? I mustsend you a poem I received as a birthday present. I think you will like it.

  2. the simplistic writing is what i admire in you neha, its always a treat and a refreshing change to stumble upon your blog. you make my life a shade better everytime you write…thank you..and please keep them coming…lots of love and best wishes

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